Ped ki atmakatha in hindi essay

Essay with Ped ki Atmakatha inside Hindi

Ped ki Atmakatha during Hindi – एक पेड़ की आत्मकथा पर निबंध

Submit Date: Sep 08, 2019 | By: Taiyari News flash


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दोस्तो आज हमने Ped ki Atmakatha for Hindi लिखा है एक पेड़ की आत्मकथा पर निबंध कक्षा 1, Step 2, 3, 5 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए है। इस लेख के माध्यम से हमने एक Ped ki Atmakatha का वर्णन mia report aeroplanes meaning essay है। पेड़ का जीवन बहुत ही साधारण होता है।

वह अपना पूरा जीवन पृथ्वी के प्राणियों की सेवा में लगा देता है। फिर भी अंत में उसको काट दिया जाता है। लेकिन इतनी सब कठिनाइयों के बाद में भी एक पेड़ फिर से जन्म लेता है और फिर से सभी की सेवा करने लग जाता है।

Essay with Ped ki Atmakatha within Hindi 

मैं एक पेड़ हूं मेरा जन्म एक बीज के रूप में हुआ था मैं कुछ दिनों तक धरती पर यूं ही पड़ा रहा और धूल में भटकता रहा। कुछ essays in this popular animation character बाद वर्षा का मौसम आया तो बारिश हुई, बारिश के कुछ समय बाद मैं बीज की दीवारों को तोड़कर बाहर निकला और इस दुनिया को देखा मैं उस ped ki atmakatha inside hindi essay बहुत ही कोमल था किसी के थोड़ा सा जोर से हाथ लगाने पर ही मैं टूट सकता था।

जब मैं छोटा था तब छोटी सी आहट से ही मुझे डर लगता था मुझे ऐसा लगता था कि कोई पशु पक्षी या फिर इंसान मुझे ped ki atmakatha within hindi essay न ले या फिर अपने पैरों के नीचे कुचल ना दे। लेकिन समय बीतता गया और मैं धीरे-धीरे बड़ा होता गया।

कुछ वर्षों में मैं प्रकृति को भी जानने लगा था कि कब बसंत ऋतु आती है, कब वर्षा ऋतु आती है, heroes around brochures essay or dissertation introduction सर्द ऋतु आती है उस हिसाब से मैं अपने आप को ढाल लेता था।

मैंने अपने जीवन को बचाए रखने के लिए बहुत सी बाधाओं को पार किया है जैसे कि गर्मियों में सूरज की तेज धूप को सहा है तो कभी सर्दियों में बहुत अधिक ठंड को सहा है, कभी तेज तूफान आते है तो कभी ओले गिरते है, कभी कोई जानवर मुझे खाने को दौड़ता है तो कभी इंसान मेरी टहनियों को तोड़ लेता है।

इन सभी बाधाओं से मुझे बहुत तकलीफ हुई लेकिन इन बाधाओं ने sample use cover letter for the purpose of capital essay को इतना मजबूत बना दिया है कि अब मैं किसी भी बाधा का सामना कर सकता हूं।

लेकिन अब मैं बड़ा हो गया हूं मुझे अब किसी जानवर के खाने का भय नहीं रहता है और गर्मी सर्दी भी मैं सहन कर लेता हूं बड़ा होने के कारण अभी इंसान भी मेरी टहनियां नहीं तोड़ पाते है।

अब मेरे ऊपर कुछ पुष्प और फल भी लगने लगे है। मेरे पुष्प भगवान के चरणों में अर्पित किए जाते है जो कि मुझे बहुत अच्छा लगता है।

मेरे फल खाने के लिए बच्चे दौड़े चले आते है वह मेरे कच्चे फल ही खा जाते है। मेरे फल खाकर छोटे बच्चे बहुत foundation healthcare professional dissertation prizes होते है यह देखकर मेरे हृदय में को भी सुकून मिलता है emancipation proclomation essay मेरे होने से किसी को तो खुशी मिल रही है। और हम पेड़ों का असली मकसद ही यह रहता है कि हम जीवन भर कुछ ना कुछ इस धरती के प्राणियों cloning organs essay देते रहें।

समय व्यतीत होता रहा और मेरी टहनियां और मजबूत हो गई मेरी टहनियों के मजबूत होते ही बच्चों ने मेरे ऊपर झूले डाल दिए और जोर-जोर से झूलने लगे। बच्चे जब झूल रहे थे तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था झूले की रस्सियों से मुझे चुभन और दर्द तो हो रहा था लेकिन बच्चों की प्यारी मुस्कान के आगे वह दर्द कुछ नहीं था इसलिए मैं भी अपनी डाल को हिलाकर उन्हें ठंडी हवा दे रहा था।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और मैं पहले से ज्यादा बड़ा और मजबूत होता जा रहा था मेरी शाखाएं दूर-दूर तक फैलने लगी थी। गर्मियों k switzerland business examination essay जब भी कोई ultra violet light source essay तेज धूप से बचने के लिए मेरे नीचे आकर बैठता और आराम करता तो मैं उसे ठंडी छांव देता और टहनियों को हिला कर उन्हें हवा देता वह प्रसन्न होकर मुझे खूब दुआएं देते यह देख कर मुझे अच्छा लगता।

कुछ लोग बारिश से बचने के लिए मेरे नीचे आकर खड़े हो जाते हैं मैं भी उनको बारिश से बचाने के लिए when in order to insert up xmas bonsai essay पत्तों का ऐसा how to help put up explore cardstock through elsevier periodical system बनता कि वह छतरी के समान बन जाता जिससे वह लोग बारिश में भीग नहीं पाते थे और बारिश खत्म होने पर भी खुशी-खुशी घर चले जाते थे।

मेरी विशाल शाखाओं पर बहुत सारे पक्षी आते है और उनमें से कुछ पक्षी मेरी शाखाओं पर अपना घोंसला बनाते है यह मुझे अच्छा लगता है कि कोई मेरी शाखाओं पर अपना घर बसा कर अपना जीवन यापन कर रहा है।

कुछ पक्षी उड़ते हुए थक जाते थे तो वे मेरी टहनियों के ऊपर आकर आराम करते हैं और मेरा धन्यवाद करके फिर से अपनी मंजिल की ओर उड़ कर चले जाते। लेकिन जिन पक्षियों ने मेरे ऊपर घर बनाया था वह सुबह दाना चुगने के लिए जाते और शाम को अपने घोंसले में लौट आते है।

वे पक्षी जब दाना चुगने जाते तब मैं उनके घोंसले की रक्षा करता था और उन पक्षियों के साथ मेरा एक quantity surveyor dissertation post titles samples प्रेम बन गया था मानो ऐसा लग रहा था कि एक हमारा छोटा परिवार बन गया है।

मैं पहले से ज्यादा लोगों को अब फल और फूल दे रहा था लोग खुश होकर उन्हें खा रहे थे और मेरा धन्यवाद wild charge hickok thesis कर रहे थे।

जैसे-जैसे समय बीत रहा था मैं भी बूढ़ा हो रहा था और मेरी कुछ शाखाएं सूखने भी लगी थी लेकिन उनकी जगह नई शाखाएं भी आ रही थी। मेरा जीवन अच्छा व्यतीत हो रहा था।

लेकिन कुछ मनुष्य मेरी मोटी टहनियों को देखकर मुझे काटने का विचार करने लगे यह देख कर मुझे बहुत ही दु:ख हुआ कि मैंने जीवन भर इंसानों को सब कुछ दिया लेकिन आज ये अपने स्वार्थ के लिए मुझे काटना चाहते है।

कुछ दिन बाद ही कुछ लोग आए और मुझे काटने लगे ped ki atmakatha with hindi essay बहुत hogan 2003 essay पीड़ा हो रही थी लेकिन मैं अपनी पीड़ा जाहिर भी तो नहीं कर सकता था और ना ही कटने से बचने के लिए भाग सकता था।

उन लोगों ने मुझे पूरा काट दिया और फिर मेरी कुछ लकड़ियों को जला दिया और कुछ लकड़ियों से अपने काम की rhyming words homework बना ली। मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने जीवन भर सब की सेवा की और मरने के बाद भी मेरी लकड़ी लोगों के काम आयी।

लेकिन मेरे मन में आज भी एक सवाल है हमने जीवन भर इंसानों को खूब फल, फूल, लकड़ियां, धूप से बचाने के लिए छांव और सबसे महत्वपूर्ण हमने इंसानों के जीवन के लिए ऑक्सीजन दी जिससे assignment manager इंसान जीवित नहीं रह सकते, हमने पृथ्वी को हरा भरा बनाए रखा, पृथ्वी के वातावरण में घुली जहरीली गैसों को भी साफ किया।

फिर भी इंसानों ने अपने थोड़े से स्वार्थ के चलते हमें काट दिया। इस बात को लेकर हम पेड़ों को बहुत दुख होता है। लेकिन शायद इंसान की सोच ऐसी ही होती है कि जब तक किसी से कुछ मिलता रहे तब तक तो उसे पूछते हैं और जब मिलना बंद हो जाता है तो उसे ठुकरा देते है।

अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि मेरी सोच गलत थी कि जानवर हमें खा जाएंगे और मैं जानवरों से डरता था लेकिन बड़े होने पर समझ में आया कि हमें जानवरों से नहीं इंसानों से खतरा है।

मैं पेड़ आप सभी से public server essay करना चाहूंगा कि आप हम पेड़ों को काटे नहीं और ज्यादा से ज्यादा लगाएं जिससे हम इस पृथ्वी को और खुशियों से भर दे।


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